Saturday, December 12, 2020

आवाज़ दिल की....

आवाज़ दिल की....

ये दिल तू अकेला था, अकेला है, और अकेला रह गाया, तुझे कोई नही चाहता क्योंकि तू टूटकर चूर हो गया।

 किसी ने तुझे थूतकारा, तो किसीने तुझे  फुटबाल की तरह किक मारी, किसी ने तुझे इस्तेमाल किया, तो किसीने अपने अरमान पूरे किए, पर..तू ने सभी को अपना माना, भरोसा किया और आशा की, पर क्या हुआ तेरा??? तू अकेला था, अकेला है, और अकेला ही रह गया।

तूने आपने आप को ऐसा माना की तु जैसा है अच्छा है, पर लोगो ने तेरा मजक बनाया, तब भी तूने अपने आप पर ही हस दिया। अपने आपको बदलना चाहा तो टूटता चला गया, पर फिर भी चू न  की और चुप चाप सहता चला गया, इसलिए दिल तू टूटता चला गया।

आज तुझे कोई देखता ही नही क्योंकि तेरे ज़रूरत यह किसीको नही, ज़माना आगे चाला गया और तू वही रुख गया इसीलिए,ये दिल तू अकेला था, अकेला है,और अकेला रह गया।

By Sai Sowmya